Thursday, September 2, 2010

ग़ज़ल-जन्माष्टमी......

है योमे अष्टमी दिल पर खुशी सी छाई है

किशन के जन्म की सब को बहुत बधाई है



हुआ है मुज़्तरिब बातिल उदास रह्ता है

कज़ा के खौफ ने दिल मे जगह बनाई है



छिटक के गिर गयी ज़ंजीर खुल गये ताले

पिता की गोद में जल्वा किशन कन्हाई है



योमे- दिन  ,  अष्टमी- आठवीं  (योमे अष्टमी -   जन्माष्टमी)   ,
मुज़्तरिब- बेचैन ,       बातिल- जो सत्य न हो, झूठ, मिथ्या,
नियम-विरुद्ध,निकम्मा  (यहा पर कंस के लिये या उस्के कार्य के अर्थ में)
क़ज़ा- म्रत्यु ,      खौफ- डर,      जल्वा- विराजमान

16 comments:

  1. छिटक के गिर गयी ज़ंजीर खुल गये ताले

    पिता की गोद में जल्वा किशन कन्हाई है

    अजमल भाई...लाजवाब...वाह...

    नीरज

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  2. बहुत ही बेहतरीन, बेहद खूबसूरत ग़ज़ल लिखी है अजमल भाई.... बहुत-बहुत बधाई!

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  3. sundar gazal wah wah....
    janamashtmi ki badhaai.

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  4. हुआ है मुज़्तरिब बातिल उदास रह्ता है
    कज़ा के खौफ ने दिल मे जगह बनाई है
    लाजवाब कर देने वाला शेर है, किसी भी अत्य्चारी व्यक़्ति
    के डर और उसकी लाचारी को सटीक पेश किया है.
    (शायद कंस की यही दिमागी स्थिति रही होगी.)
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर बहुत ही सुंदर गज़ल कही है
    बधाई हो.
    छिटक के गिर गयी ज़ंजीर खुल गये ताले
    पिता की गोद में जल्वा किशन कन्हाई है

    खूब्सूरत वाह वाह....

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  5. क़ौमी यक्जहती की ख़ूबसूरत मिसाल पेश की है आपने

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  6. अजमल साहेब, सलाम!
    बेहद भाया आपका कलाम!
    हिन्दू और मुसलमान तो होते हैं नेता,
    इंसान होती है तमाम आवाम!

    कौमी एकता की मिसाल हैं!
    डॉ साहब आप कमाल हैं!
    आशीष
    --
    अब मैं ट्विटर पे भी!
    https://twitter.com/professorashish

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  7. है योमे अष्टमी दिल पर खुशी सी छाई है
    किशन के जन्म की सब को बहुत बधाई है

    मेरी ओर से भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई.
    बहुत सुंदर गज़ल कही है

    छिटक के गिर गयी ज़ंजीर खुल गये ताले
    पिता की गोद में जल्वा किशन कन्हाई है

    शानदार , ख़ूबसूरत,कमाल वाह वाह ..

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  8. .

    छिटक के गिर गयी ज़ंजीर खुल गये ताले

    पिता की गोद में जल्वा किशन कन्हाई है

    Mind blowing creation !

    zealzen.blogspot.com
    ..

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  9. nice post and nice gazal, waah waah.

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  10. अजमल भाई, बहुत दिनों से आपकी नई पोस्‍ट नहीं आई।

    क्‍या कारण है भाई।

    ---------
    मन की गति से सफर...
    बूझो मेरे भाई, वृक्ष पहेली आई।

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  11. नववर्ष २०११ की हार्दिक शुभकामनाएँ.
    आशा है इस ब्लॉग पर कुछ नया नए साल में पढ़ने को मिलेगा .

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