दाता जल दे ......दाता जल दे .......... सही समय पर आप ने दुआ की है, सच मे बहुत गर्मी है बरसात की बहुत ज़रूरत है. छोटी बहर मे बडी खूबसूरत गज़ल कही है, मेरी दाद कबूल करें...
डॉ साहब बहुत ही जोखिम भरा काम आपने बड़ी मेहनत और जिम्मेदारी से कर दिखाया है इतनी छोटी बहर लेकर क्या शेर कहे हैं ... वाह ! और.... " थोड़ा कल दे " का तो जवाब ही नहीं है ग़ज़ल कहने का शानदार सलीक़ा आपने कामयाबी से हम सब तक पहुंचाया है आपकी दुआएं क़बूल हों ... हम सब यही दुआ करते हैं मुबारकबाद .
भाई इतने लोग जब कहते हैं तो बिल्कुल सही ही कहते हैं..पूरी ग़ज़ल मे कड़ी गरमी से त्रस्त दुनिया की बारिश के लिये आर्द्र फरियाद सी शिद्दत है..छोटी बह्र के जादू मे आपने निहायत खूबसूरती से जज्बात को साधा है..और शब्दों को किफ़ायत से इस्तेमाल करते हुए प्यासे इंसान की पुकार को सुर दिया है..उम्मीद है दाता ने भी पुकार सुनी होगी..और यह मिस्रे असर कर रहे होंगे..
Aap sabhi ko mera namashkar.main jo bhi thodabahut likhta hoon es blog "meri nazar" ke madhyam se aap ke saamne pesh kar raha hoon, umeed hai aap ko pasand ayeega. aap ki qiimti rai ka intizar rahega.........
छोटी बहर में ग़ज़ल कहना बहुत मुश्किल काम होता है लेकिन आपने इसे बखूबी निभाया है...बेहतरीन शेर कहे हैं...मेरी दाद कबूल करें...
ReplyDeleteनीरज
Sach..kam alfaaz aur bahut sundar,saral gazal..!
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत....ऐसा लगा कि नन्ही नन्हीं बूँदें बरस रही हों
ReplyDeleteपैरोडी जैसी रचना बहुत ही सुन्दर बन पड़ी है!
ReplyDeleteडॉ साब,
ReplyDeleteमेरी भी दुआ शामिल कर लीजिये.....
टूट के बरसे इस बार पानी!
मिट जाएँ पुरानी सारी निशानी!
कुछ ऐसा असर करे आब-ओ-अब्र,
शुरू कर पाऊँ कोई नयी कहानी!
दाता जल दे ......दाता जल दे ..........
ReplyDeleteसही समय पर आप ने दुआ की है, सच मे बहुत गर्मी है
बरसात की बहुत ज़रूरत है.
छोटी बहर मे बडी खूबसूरत गज़ल कही है,
मेरी दाद कबूल करें...
डॉ साहब
ReplyDeleteबहुत ही जोखिम भरा काम
आपने बड़ी मेहनत और जिम्मेदारी से कर दिखाया है
इतनी छोटी बहर लेकर क्या शेर कहे हैं ... वाह !
और.... " थोड़ा कल दे " का तो जवाब ही नहीं है
ग़ज़ल कहने का शानदार सलीक़ा
आपने कामयाबी से हम सब तक पहुंचाया है
आपकी दुआएं क़बूल हों ... हम सब यही दुआ करते हैं
मुबारकबाद .
शानदार गज़ल, हर एक शेर खूबसूरत,
ReplyDeleteमौसम के मिज़ाज से मेल खाता हुआ.
बधाई हो........
क्यों है गरमी
कुछ तो हल दे .....दाता जल दे .......
है तू पालक
ReplyDeleteतो फिर बल दे.
तुझ को पूजा
तू अब फल दे .
दुआ ही ही उम्मीद की आखिरी सीढ़ी है ....उम्मीद भी उसी से की जा सकती है .....!!!
बहुत सुंदर भाव ईश्वर के प्रति ......आमीन ...!!
बहुत सुंदर
ReplyDeletenice post, best of luck.....
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ReplyDelete:) ab bhali hai ek dum nirdosh.. bachhjon ki aankhon si ghazal ..
ReplyDeleteदाता जल दे
ReplyDeleteथोडा कल दे.
तुझ को पूजा
तू अब फल दे
महके धरती
जीवन चल दे .
bahut sundar gazal kahee hai
wah wah......
ye sher meri pasand ke hain.
चंद लफ़्ज़ों में बात कहने की,
ReplyDeleteहमको आदत मिली ज़हीनों में।
बड़ी खूबसूरती से निबाह किया है छोटी बह्र का।
waah bahut sundar ! chhote chhote vaky arth bhare ..!
ReplyDeleteडॉक्टर साहब
ReplyDeleteक्या कहने !
सुभानल्लाह !
दाता जल दे
थोडा कल दे
शानदार ग़ज़ल के लिए बधाई !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं
yachna ko khoobsoorati se ukera hai aapne
ReplyDeleteगहरी बात....
ReplyDeleteचंद शब्दों में...
गागर में सागर....
वाह !
हरदीप
shandaar hai gazal,
ReplyDeletebahut sundar shabd chayan,
chhoti si bahar main kamaal likha hai.
wah wah wah wah........
वाक़ई छोटी बहर में बहुत ख़ूबसूरती से अपनी बात कही है आप ने ,
ReplyDeleteहै तू पालक
तो फिर बल दे.
तुझ को पूजा
तू अब फल दे .
याचना का ये तरीक़ा भी अलग ही है
समझ सकूँ मैं
ReplyDeleteमुझे अकल दे !
सुन्दर लिखा है भाई आपने ! छोटी बहर को साधना और बड़ी चुनौती है ! आभार !
इतनी छोटी बहर मे भी इतने शानदार शेर? वाह आपकी कलम का कमाल है। सभी अशार दिल को छू गये। बधाई
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना। वाह!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर कल्पना और कृति
ReplyDeleteअजमल भाई, छोटी बहर में कमाल कर दिया आपने।
ReplyDelete................
नाग बाबा का कारनामा।
व्यायाम और सेक्स का आपसी सम्बंध?
भाई इतने लोग जब कहते हैं तो बिल्कुल सही ही कहते हैं..पूरी ग़ज़ल मे कड़ी गरमी से त्रस्त दुनिया की बारिश के लिये आर्द्र फरियाद सी शिद्दत है..छोटी बह्र के जादू मे आपने निहायत खूबसूरती से जज्बात को साधा है..और शब्दों को किफ़ायत से इस्तेमाल करते हुए प्यासे इंसान की पुकार को सुर दिया है..उम्मीद है दाता ने भी पुकार सुनी होगी..और यह मिस्रे असर कर रहे होंगे..
ReplyDeleteमहके धरती
जीवन चल दे .
छोटी बहर वो भी इतनी छोटी .... कमाल की ग़ज़ल है ....
ReplyDeleteअजमल भाई, इतनी छोटी बहर में आपने सचमुच कमाल कर दिया। बहुत बहुत बधाई।
ReplyDelete--------
ये साहस के पुतले ब्लॉगर।
व्यायाम द्वारा बढ़ाएँ शारीरिक क्षमता।
बहुत ही बढ़िया लगी ग़ज़ल, पढ़ कर मज़ा आ गया।
ReplyDeletesundar rachna
ReplyDeletebadhai........
wahwa..wahwa..bahut khoob...
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