पिता वो हैं जो जीवन
राह पे चलना सिखाते हैं ।
डगर कैसी भी हो हर
हाल में बढ़ना सिखाते हैं ।
जो हम गिरते संभलते हैं
वो बढ़कर थाम लेते हैं ।
हमारी हार में भी धैर्य
से वो काम लेते हैं ।
कभी पलकों में रखते हैं
कभी दिल में बसाते हैं ।
हमारे अनगिनत सपने
वो आँखों में सजाते हैं ।
हमारी हर ख़ुशी उनके
हृदय में जोश देती है ।
हमारी छोटी सी गलती
भी उनको होश देती है ।
वो तजते हैं सभी खुशियाँ
हमारे ज्ञान की खातिर ।
वो हम को डांटते केवल
हमारे मान की खातिर ।
हमारे कच्चे मन को
दुनिया के दुःख से बचाते हैं ।
हमारे साथ हँसते हैं
हमारे साथ गाते हैं ।
वो बुधि दे हमें दाता
सदा हम मान रख पांये ।
समय कैसा भी हो
हर हाल में हम ध्यान रख पांये ।
बड़ा मज़बूत और सच्चा
सहारा हम बने उनका ।
हर एक मुश्किल में राहत
का किनारा हम बने उनका ।
बड़े होकर के पापा का
करें सिर गर्व से ऊँचा ।
रखें अपने को ऊँचा और
अपने घर को हम ऊँचा ।
यही “माहक” की श्रद्धा है
यही उसका समर्पण है ।
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Saturday, June 19, 2010
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