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Tuesday, June 8, 2010

गज़ल- रंग- ए - दुनिया

देख  बाग़-ए- बहार   है दुनिया

चमचमाता निखार है दुनिया ।


कौन जाने किसे मिले क्या क्या

एक खुला सा बज़ार है दुनिया ।


जेब में नोट और दिल खाली

वाह क्या माल दार है दुनिया ।


क्यों ज़रा भी सुकूं नहीं दिल में

देख तो लालाज़ार है दुनिया ।


शान   वाले   कहाँ   गये  देखो

अब न वो शानदार है दुनिया ।


कुछ न पूंछो कि हो गया है क्या

हो गई क्यों शिकार है दुनिया ।


भागती   जा   रही   कहाँ  देखो

रेत पर क्यों सवार है दुनिया ।


दिल दुखाते कभी कभी अपने

रो रही   ज़ार ज़ार  है दुनिया ।


क्यों बिला वजह  बन गये दुश्मन

दामन- ए- दाग़  दार  है   दुनिया ।


जो गुज़र कर चला गया पीछे

वक़्त की याद ग़ार है दुनिया ।


हम कभी बोलते नहीं "माहक"

पूछती  बार   बार   है   दुनिया ।