देख बाग़-ए- बहार है दुनिया
चमचमाता निखार है दुनिया ।
कौन जाने किसे मिले क्या क्या
एक खुला सा बज़ार है दुनिया ।
जेब में नोट और दिल खाली
वाह क्या माल दार है दुनिया ।
क्यों ज़रा भी सुकूं नहीं दिल में
देख तो लालाज़ार है दुनिया ।
शान वाले कहाँ गये देखो
अब न वो शानदार है दुनिया ।
कुछ न पूंछो कि हो गया है क्या
हो गई क्यों शिकार है दुनिया ।
भागती जा रही कहाँ देखो
रेत पर क्यों सवार है दुनिया ।
दिल दुखाते कभी कभी अपने
रो रही ज़ार ज़ार है दुनिया ।
क्यों बिला वजह बन गये दुश्मन
दामन- ए- दाग़ दार है दुनिया ।
जो गुज़र कर चला गया पीछे
वक़्त की याद ग़ार है दुनिया ।
हम कभी बोलते नहीं "माहक"
पूछती बार बार है दुनिया ।
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Tuesday, June 8, 2010
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